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Sunday, November 16, 2014

रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद



रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद के बीच एक दुर्लभ संवाद आपसे शेयर कर रहा हूँ....हो सकता है जीवन जीने का कुछ नया नज़रिया मिल जाए....या फिर मिल जाए कुछ चुनिन्दा प्रश्नो के व्याख्यान...गौर से पढ़िएगा पूरा पढ़िएगा...!!!

रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद के बीच एक दुर्लभ संवाद

स्वामी विवेकानंद : मैं समय नहीं निकाल पाता. जीवन आप-धापी से भर गया है.


रामकृष्ण परमहंस : गतिविधियां तुम्हें घेरे रखती हैं. लेकिन उत्पादकता आजाद करती है.

स्वामी विवेकानंद : आज जीवन इतना जटिल क्यों हो गया है?

रामकृष्ण परमहंस : जीवन का विश्लेषण करना बंद कर दो. यह इसे जटिल बना देता है. जीवन को सिर्फ जिओ.

स्वामी विवेकानंद : फिर हम हमेशा दुखी क्यों रहते हैं?

रामकृष्ण परमहंस : परेशान होना तुम्हारी आदत बन गयी है. इसी वजह से तुम खुश नहीं रह पाते.

स्वामी विवेकानंद : अच्छे लोग हमेशा दुःख क्यों पाते हैं?

रामकृष्ण परमहंस : हीरा रगड़े जाने पर ही चमकता है. सोने को शुद्ध होने के लिए आग में तपना पड़ता है. अच्छे लोग दुःख नहीं पाते बल्कि परीक्षाओं से गुजरते हैं. इस अनुभव से उनका जीवन बेहतर होता है, बेकार नहीं होता.

स्वामी विवेकानंद : आपका मतलब है कि ऐसा अनुभव उपयोगी होता है?

रामकृष्ण परमहंस : हां. हर लिहाज से अनुभव एक कठोर शिक्षक की तरह है. पहले वह परीक्षा लेता है और फिर सीख देता है.

स्वामी विवेकानंद : समस्याओं से घिरे रहने के कारण, हम जान ही नहीं पाते कि किधर जा रहे हैं...

रामकृष्ण परमहंस : अगर तुम अपने बाहर झांकोगे तो जान नहीं पाओगे कि कहां जा रहे हो. अपने भीतर झांको. आखें दृष्टि देती हैं. हृदय राह दिखाता है.

स्वामी विवेकानंद : क्या असफलता सही राह पर चलने से ज्यादा कष्टकारी है?

रामकृष्ण परमहंस : सफलता वह पैमाना है जो दूसरे लोग तय करते हैं. संतुष्टि का पैमाना तुम खुद तय करते हो.

स्वामी विवेकानंद : कठिन समय में कोई अपना उत्साह कैसे बनाए रख सकता है?

रामकृष्ण परमहंस : हमेशा इस बात पर ध्यान दो कि तुम अब तक कितना चल पाए, बजाय इसके कि अभी और कितना चलना बाकी है. जो कुछ पाया है, हमेशा उसे गिनो; जो हासिल न हो सका उसे नहीं.

स्वामी विवेकानंद : लोगों की कौन सी बात आपको हैरान करती है?

रामकृष्ण परमहंस : जब भी वे कष्ट में होते हैं तो पूछते हैं, "मैं ही क्यों?" जब वे खुशियों में डूबे रहते हैं तो कभी नहीं सोचते, "मैं ही क्यों?"

स्वामी विवेकानंद : मैं अपने जीवन से सर्वोत्तम कैसे हासिल कर सकता हूँ?

रामकृष्ण परमहंस : बिना किसी अफ़सोस के अपने अतीत का सामना करो. पूरे आत्मविश्वास के साथ अपने वर्तमान को संभालो. निडर होकर अपने भविष्य की तैयारी करो.

स्वामी विवेकानंद : एक आखिरी सवाल. कभी-कभी मुझे लगता है कि मेरी प्रार्थनाएं बेकार जा रही हैं.

रामकृष्ण परमहंस : कोई भी प्रार्थना बेकार नहीं जाती. अपनी आस्था बनाए रखो और डर को परे रखो. जीवन एक रहस्य है जिसे तुम्हें खोजना है. यह कोई समस्या नहीं जिसे तुम्हें सुलझाना है. मेरा विश्वास करो- अगर तुम यह जान जाओ कि जीना कैसे है तो जीवन सचमुच बेहद आश्चर्यजनक है.

श्रोत-इंटरनेट

Saturday, July 19, 2014

India Vs ISIS


Indians forcibly repelled from their home to skip themselves offshore..it regularly act as a Life Menace scattered over all world...!!
Domestic Working condition and Flavoured Globalization make them ready to enter in Vulnerable Zone, Leaving behind their family over here...!!!
Its not only a case of ISIS(Islamic State of Iraq and al-Sham) but a regular act which mostly affect our countrymen...!!
Why they're pushed to go beyond country-land, Government should think upon just making their comeback isn't a issue.
What about their future plans?? They're already empty handed now who'll look after their families...!! More questions are in my mind a lots, but whom to ask...!!

- Misra Raahul

मराकेश संधि

 

भारत द्वारा मराकेश संधि पर हस्ताक्षर।
दृष्टिहीन, दृष्टिबाधित और छपी पुस्तकों को पढ़ पाने में असमर्थ व्यक्तियों की ब्रेल लिपि, बड़े आकार के पाठ और श्रव्य पुस्तकों (Audio Books) के रूप में प्रकाशित सामग्री तक पहुंच बढ़ाने के लिए ‘मराकेश संधि’(Marrakesh Treaty) हस्ताक्षरित की गई थी।
- यह संधि ‘विश्व बौद्धिक संपदा संगठन’(WIPO : World Intellectual Property Organization) द्वारा प्रशासित विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय कॉपीराइट संबंधी संधियों की शृंखला में नवीनतम है।
- 28 जून, 2013 को मराकेश (मोरक्को) में हस्ताक्षरित इस संधि में शामिल देशों को अपने कॉपीराइट संबंधी नियमों में ऐसे अपवादों और सीमाओं को शामिल करना होगा जो दृष्टि संबंधी समस्याओं वाले व्यक्तियों हेतु प्रकाशित सामग्री उपयुक्त प्रारूप में सुलभ कर सकें, साथ ही ऐसी सामग्री के सीमा-पार आदान-प्रदान की भी अनुमति देनी होगी ताकि लाभार्थियों को अधिकाधिक फायदा पहुंचे।
- इस संधि के लागू होने के लिए संधि में शामिल देशों में से कम से कम 20 देशों द्वारा इसका अनुसमर्थन आवश्यक है।
- विश्व बौद्धिक संपदा संगठन के कुल 187 सदस्य देशों में से 64 देशों द्वारा इस संधि पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं।
- यद्यपि किसी भी देश द्वारा संधि का अनुसमर्थन न किए जाने के कारण यह संधि लागू नहीं हो सकी है।

मराकेश संधि एवं मराकेश समझौता में भिन्नता
उल्लेखनीय है कि मराकेश संधि (Marrakesh Treaty) और मराकेश समझौता (Marrakesh Agreement) परस्पर भिन्न हैं।
- मराकेश संधि दृष्टि समस्याग्रत लोगों हेतु कॉपीराइट अपवादों से संबंधित है जबकि 15 अप्रैल, 1994 को मराकेश (मोरक्को) में हस्ताक्षरित मराकेश समझौते द्वारा विश्व व्यापार संगठन (WTO : World Trade Organization) की स्थापना हुई जो 1 जनवरी, 1995 को अस्तित्व में आया।

- Misra Raahul
FB:https://www.facebook.com/er.rahulmisra
Blog: http://rahulknowledgefactory.blogspot.in/

Wednesday, April 23, 2014

"जेम्स बॉन्ड" बनाम "इंडियन हीरो"


भारतियों मे हीरो बनाने के अलग कायदे है जो कि बाकी विश्व से थोड़े से अलग बैठते।
जैसे हमारा हीरो आदर्शवादी होना चाहिए क्यूंकी वो हीरो है बस नायक नहीं।
कुछ उदाहरण लेते हैं.....

आम हीरो
# पश्चिम के देश मे फ़ेमस स्पाइ "जेम्स बॉन्ड", व्यक्तित्व में, बॉन्ड कठोर, क्रूर, अलग, और घमंडी है - जो बोलता कम और काम करने में ज्यादा विश्वास रखता है।
वह स्वादिष्ट व्यंजन, अच्छी शराब, और सुंदर महिलाओं के साथ रहता है. स्वरूप में, वह स्टाइलिश और अच्छे कपड़े पहनता है।

हमारा हीरो
# हमारा हीरो तो आदर्शवादी, आशावादी, शिक्षा देने वाला होता। छोटा भीम की तरह बिलकुल। ढोलकपुर का नौ बरस का भीम के पास दैवीय शक्तियाँ है। बहुत ताकतवर, महा बलशाली दुश्मनों को पलक झपकते ही मटियामेट करता भीम। वो शराब नहीं पीता वो तो बस "लड्डू" खाता है जिससे उसके शरीर मे असीम ऊर्जा का संचार होता। बहुत ही बड़े दिलवाला सीधा भीम अक्सर ही लोगों को माफ भी कर देता।

पर हीरो कौन असली ये तो आपको तय करना। हीरो बनाने की परंपरा भी हमारी संस्कृति से जुड़ी है। फिल्मों मे नायक होते है हीरो नहीं। हीरो तो पदवी होती जो सबको थोड़े मिलती।

- शुभप्रभातम

मिश्रा राहुल
(ब्लोगिस्ट एवं लेखक)